Shaheed Mahendra Karma University and IIT Bhilai signed MoU on innovation and startup

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय और आईआईटी भिलाई में नवाचार व स्टार्टअप को लेकर एमओयू”

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– शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय और आईआईटी भिलाई में नवाचार व स्टार्टअप को लेकर एमओयू”

– युवा शक्ति को स्टार्टअप की ओर बढ़ाने विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान
जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर में गुरुवार को “इनोवेशन, स्टार्टअप एंड बिजनेस ऑपर्च्युनिटीज” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल रही। इस अवसर पर आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश, प्रो. संतोष बिश्वास डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट,आईआईटी भिलाई, डॉ. सौरादयुति पॉल विभागाध्यक्ष (सीएसई) , तथा डॉ. विष्णु वैभव त्रिवेदी, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, आईआईटी भिलाई, उपस्थित रहे।
प्रो. राजीव प्रकाश ने “इनोवेशन एंड स्टार्टअप” विषय को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम आवश्यक है। “छत्तीसगढ़ ज्ञान की भूमि है और जब आईआईटी जैसे संस्थानों के विद्यार्थी कृषि की ओर बढ़ते हैं, तो यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।”
कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि “भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, लेकिन उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बहुत कम विद्यार्थियों को सरकारी नौकरियाँ मिल पाती हैं। ऐसे में युवाओं को कौशल आधारित कार्य एवं स्टार्टअप की ओर अग्रसर होना होगा।” उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर विद्यार्थियों को स्वयं का स्टार्टअप प्रारंभ करने हेतु प्रोत्साहित करेगा।
प्रो. संतोष विश्वास ने अपने पावरप्वाइंट प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से “ऑर्गेनिक फार्मिंग सॉल्यूशन्स फॉर एग्रीकल्चर” पर प्रकाश डाला और कहा कि नवाचार एवं तकनीक से टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।
डॉ. विष्णु वैभव द्विवेदी ने “सेंस टेबल टेक्सटाइल फ्रॉम बस्तर, सपोर्ट फॉर रिसर्च कमर्शलाइजेशन, ड्रोन दीदी एम्पावरिंग ट्राइबल वूमेन इन एग्रीकल्चर” जैसे नवीन प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि ऐसे इनोवेशन न केवल स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण लाते हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर बस्तर की पहचान भी स्थापित करते हैं।
डॉ. सौरादयुति पॉल ने बताया कि लगभग 10 करोड़ युवा श्रमबल में शामिल होते हैं, जबकि सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र मिलाकर केवल 70 से 80 लाख नौकरियां उपलब्ध करा पाते हैं। रोजगार मूल रूप से डिमांड और सप्लाई से जुड़ा हुआ है। “जॉब इस नथिंग बट डिमांड”, यानी जब किसी प्रोडक्ट या सर्विस की मांग होगी, तभी उसके लिए रोजगार पैदा होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि युवा नए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज बनाने में आगे नहीं आएंगे, तो डिमांड नहीं बढ़ेगी और नौकरियां भी पैदा नहीं होंगी।
इस अवसर पर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय और आईआईटी भिलाई के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्टार्टअप, इनोवेशन, रिसर्च एवं स्किल डवलपमेंट के क्षेत्र में सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करना है।
आभार व्यक्त करते हुए डॉ. तूलिका शर्मा ने कहा कि “इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना कुलपति महोदय के नेतृत्व एवं प्रोत्साहन से संभव हो पाई है। एमओयू से विद्यार्थियों को नई दिशा एवं अवसर मिलेंगे।” कार्यक्रम का संचालन डॉ. रश्मि देवांगन ने किया।
इस अवसर पर प्रो. शरद नेमा, पीएम उषा समन्वयक कुलसचिव डॉ. राजेश लालवानी सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में इनक्यूबेशन स्टार्टअप सेंटर के डॉ. नीरज वर्मा, डॉ. देवेंद्र मरावी एवं डॉ. सुषमा सिंह का विशेष योगदान रहा.