contract employees:

contract employees: चुनावी साल में नियमितीकरण की मांग, संविदा कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, इन मांगों को लेकर कर रहे प्रदर्शन

Featured राज्य-छत्तीसगढ़

 

contract employees: रायपुर: चुनावी साल में नियमितीकरण की मांग पूरा नहीं करना छत्तीसगढ़ में मौजूदा सरकार को भारी पड़ सकता है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में पिछले चार वर्षो से छत्तीसगढ़ के संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर अलग -अलग जगहों पर प्रदर्शन कर रहे है। वहीँ अब छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में सहायक तकनिकी (Sub Engineer )भी नियमितिकरण की मांग पर अपने – अपने जिले में प्रदर्शन कर रहे है। दरअसल मौजूदा सरकार द्वारा 2018 चुनाव में नियमितीकरण की घोषणा के बाद संविदाकर्मी सरकार से आस लगाए बैठे है। अब 2023 चुनाव (2023 election )सिर पर आ गया है लेकिन नियमितीकरण की मांग अधूरी की अधूरी रह गयी है।

 

contract employees: छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पुरे देश में 50 % से अधिक शासकीय पद अनियमित कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। अनियमित कर्मचारियों की बुद्धि को सरकार किराये पर चला रही है. संविदाकर्मी शब्द को यदि परिभाषित करें तो यह कहना गलत नहीं है कि सरकार पढ़े लिखे काबिल युवको की बुद्धि को लीज पर ले रखा है बिलकुल वैसे ही जैसे बिल्डर जमीन नहीं खरीद पाता तो उसे लीज पर ले लेता है।

 

contract employees: बता दें कोराेना काल में जब कोई भी सामने नहीं आ रहा था उस संकट के दौर में भी हमारे संविदा कर्मचारियों ने प्रदेश की नब्ज थामी थी । एक ओर स्वास्थ्य विभाग में संविदा में कार्यरत तमाम संविदा कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अपना कर्म किया ,वहीं पंचायत विभाग में कार्यरत मनरेगा कर्मचारियों ने गांव में रोजगार देने के लिए लगे थे। कांटेक्ट ट्रेसिंग में अन्य सभी संविदा कर्मचारी की ड्यूटी भी लगी। इस दौरान सैकड़ों साथियों ने जान गवाई।

 

 

 

contract employees: महासंघ के प्रांताध्यक्ष कौशलेश तिवारी ने बताया कि इन संविदा कर्मचारियों के समर्पण , त्याग और बलिदान का भी सम्मान नहीं मिला। राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना काल में बेहतर काम के लिए सरकार ने जरूर वाह वाही बटोर ली। कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सिन्हा ने बताया कि कोरोना काल में सेवा देते शहीद कर्मचारियों के परिवार को आज भी न्याय की दरकार है।

 

contract employees: किसी भी प्रकार का सम्मानजनक न अनुदान दिया गया और न ही परिवार को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गई है। हम उन साथियों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक कुर्रे का कहना है कि ग्रामीण मजदूरों को गांव में काम देने के लिए हमारे 100 से अधिक रोजगार सहायक साथी बलिदान हुए। उनका परिवार आज भी न्याय की आश लगाए हुए हैं।