Raipur Crime: जमीन बेचने का सौदा कर 34.06 लाख लेने का आरोप, खरीदार के नाम रजिस्ट्री की बजाय बेटे के नाम कर दी जमीन

Featured राज्य-छत्तीसगढ़

Raipur Crime: रायपुर। खमतराई थाना क्षेत्र के भनपुरी इलाके में जमीन बिक्री के नाम पर 34 लाख 6 हजार रुपए लेने और बाद में खरीदार के नाम रजिस्ट्री नहीं कराने का मामला सामने आया है। धनलक्ष्मी नगर भनपुरी निवासी दुकानदार बिक्रम आदित्य पाण्डेय ने जयप्रकाश पाण्डेय और उसके बेटे आदित्य कुमार पाण्डेय के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने दोनों पर धोखाधड़ी, छल और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया है।

Raipur Crime: शिकायत के मुताबिक, भनपुरी स्थित खसरा नंबर 48/1 की जमीन में जयप्रकाश पाण्डेय का हिस्सा था। उसने अपने हिस्से की करीब 3300 वर्गफुट जमीन, जिस पर दो पक्की दुकानें बनी थीं, को 1300 रुपए प्रति वर्गफुट की दर से बिक्रम आदित्य पाण्डेय को बेचने का सौदा किया था। इस संबंध में 12 नवंबर 2024 को इकरारनामा किया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इकरारनामे के तहत शुरुआत में बैंक के माध्यम से 11.01 लाख रुपए और 11 लाख रुपए नकद दिए गए। इसके बाद 16 दिसंबर 2024 को जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया के लिए 5 हजार रुपए और दिए गए।

बाद में बढ़ी रकम और बदला गया इकरारनामा

शिकायत में बताया गया है कि 19 दिसंबर 2025 को जयप्रकाश पाण्डेय ने आर्थिक जरूरत बताते हुए 7 लाख रुपए और मांगे। इसके बाद नया इकरारनामा तैयार किया गया, जिसमें जमीन का क्षेत्रफल 2850 वर्गफुट और सौदे की कुल कीमत 37.05 लाख रुपए बताई गई। इसमें पहले दिए गए 29.06 लाख रुपए की प्राप्ति भी स्वीकार की गई।

इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को शिकायतकर्ता ने 5 लाख रुपए और दिए। इस तरह उसके मुताबिक जयप्रकाश पाण्डेय को जमीन के सौदे के तहत कुल 34.06 लाख रुपए दिए जा चुके थे।

कब्जे का प्रमाण पत्र देने का भी दावा

शिकायतकर्ता का आरोप है कि 19 दिसंबर 2025 को जयप्रकाश पाण्डेय ने 2850 वर्गफुट जमीन का आधिपत्य प्रमाण पत्र भी दिया था। इस जमीन में 150-150 वर्गफुट की दो पक्की दुकानें शामिल होने की बात कही गई है। शिकायत में परिवार के सदस्यों की सहमति से संबंधित प्रमाण पत्र दिए जाने का भी उल्लेख है।

रजिस्ट्री की जगह कराया हक त्याग विलेख

शिकायतकर्ता के मुताबिक, जयप्रकाश पाण्डेय जमीन का बंटवारा कराने और उसके नाम रजिस्ट्री कराने का आश्वासन देकर लगातार समय मांगता रहा। इसी दौरान 3 मार्च 2026 को उसने खसरा नंबर 48/1 में अपने 1/5 हिस्से को लेकर परिवार के अन्य सदस्यों के पक्ष में हक त्याग विलेख पंजीकृत करा दिया। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड से जयप्रकाश पाण्डेय का नाम हटा दिया गया।

इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को 3086.18 वर्गफुट जमीन का पंजीकृत विक्रय विलेख जयप्रकाश पाण्डेय के बेटे आदित्य कुमार पाण्डेय के नाम करा दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस जमीन में उसके साथ सौदा की गई 2850 वर्गफुट जमीन और दोनों दुकानें भी शामिल थीं। बाद में जमीन खसरा नंबर 48/3 में आदित्य पाण्डेय के नाम दर्ज हो गई।

सिविल कोर्ट में भी पहुंचा था विवाद

शिकायतकर्ता ने बताया कि रजिस्ट्री में लगातार देरी होने के बाद उसने जयप्रकाश पाण्डेय के खिलाफ षष्ठम व्यवहार न्यायाधीश द्वितीय श्रेणी, रायपुर की अदालत में व्यवहार वाद क्रमांक ए/0000032/2026 दायर किया था।

शिकायत के अनुसार, मामले की कार्यवाही के दौरान ही संबंधित जमीन का हक त्याग विलेख और उसके बाद विक्रय विलेख कराया गया। बाद में शिकायतकर्ता ने 17 जून 2026 को अदालत की सहमति से उक्त वाद वापस ले लिया।

पुलिस से कार्रवाई की मांग

बिक्रम आदित्य पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि जयप्रकाश पाण्डेय और उसके बेटे आदित्य पाण्डेय ने एकराय होकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के नाम पर उससे 34.06 लाख रुपए लिए और बाद में उसी संपत्ति का स्वामित्व बदल दिया।

Raipur Crime: शिकायतकर्ता ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र समेत उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के साथ जमीन और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी पुलिस को सौंपे जाने की बात कही गई है। पुलिस जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।