sikkim yatra

Things we should learn from Sikkim-avinash chandrawanshi

Featured latest देश-विदेश

ये बातें जो हमें सिक्किम से सीख लेनी चाहिए

किसी भी राज्य की राजधानी उसकी व्यवस्थाओं का आईना होती है। कानून व्यवस्था, विकास का मॉडल, सिविक सेंस—ये सभी राजधानी से ही पूरे प्रदेश में प्रतिबिंबित होते हैं। राजधानी पर सरकार का भी विशेष फोकस होता है और जनता की नजर भी वहीं टिकती है।लेकिन तब क्या, जब किसी एक राज्य की व्यवस्था पूरे देश के लिए उदाहरण बन जाए? नमस्कार, मेरा नाम अविनाश चंद्रवंशी है। मैं रायपुर, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी है, में बीएस टीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ न्यूज़ चैनल में बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत हूँ।मैं 15 फरवरी से 21 फरवरी तक भारत के उत्तर-पूर्व में बसे खूबसूरत राज्य सिक्किम के शैक्षणिक दौरे पर था। इस यात्रा से पहले मेरे मन में पहाड़ों की बर्फीली चादरों में खो जाने, ठंडी वादियों का आनंद लेने और प्रकृति के बीच कुछ सुकून के पल बिताने की उत्सुकता थी।लेकिन जैसे ही मैंने गंगटोक की धरती पर कदम रखा, वहां के स्थानीय लोगों ने सबसे पहली बात कही—
“प्लास्टिक पानी की बोतल छोड़ दीजिए, हमारा राज्य प्लास्टिक-फ्री है।”

sikkim yatra

यह सुनकर मैंने आसपास की दुकानों, डस्टबिन, फास्ट फूड स्टॉल और गलियों पर नजर डाली। यकीन मानिए, मुझे प्लास्टिक का एक छोटा-सा टुकड़ा भी नजर नहीं आया।पूरा दिन मैं गंगटोक के बाजारों, होटलों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमता रहा, लेकिन कहीं भी प्लास्टिक कचरा दिखाई नहीं दिया।यह सिर्फ सफाई नहीं थी, यह एक सोच थी—एक सामूहिक जिम्मेदारी, जिसे सरकार और जनता दोनों ने मिलकर निभाया है।

ट्रैफ़िक सिग्नल फ्री सिटी

सिक्किम की राजधानी गंगटोक है पूरे प्रदेश की आबादी 7 लाख जिसमे से लगभग 4 लाख आबादी राजधानी गंगटोक में हूँ बसती है लेकिन 4 लाख आबादी वाले इस राजधानी में ट्रैफ़िक सेंस देखकर मैं दंग रह गया , जी हाँ गंगटोक की सड़को पैट एक भी ट्रैफ़िक सिग्नल नहीं है और ना इसकी ज़रूरत नज़र आई , क्यूंकि यहाँ के लोग पिछले लंबे समय से सिंगल लेन रास्ते पर सफर करते हैं उन्हें मालूम है कि एक गलती से पहाड़ों पर वाहनो की लंबी कतार लग सकती है ।इसलिए यहाँ कोई भी ओवर स्पीड ड्राइविंग नहीं करते और रोड सेफ्टी का पूरा ध्यान रखते हैं और यह केवल सरकार का प्रयास नहीं बल्कि आम लोगों के सिविक सेंस का उदाहरण है । गजब का सिविल सेंस ,जहां ट्रैफ़िक नियमों का पालन करने ना कोई विज्ञापन ना कोई अभियान , है तो बस अपने शहर को सुंदर और व्यवस्थित रखने का संकल्प । हालाकि की कम आबादी का भी एक बड़ा फायदा है ।

sikkim yatra
sikkim yatra

क्राइम फ्री सिटी

आपने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि किसी राज्य की राजधानी में कानून व्यवस्था संभालने के लिए सिर्फ एक ही थाना हो… और फिर भी अपराध नियंत्रण की मिसाल कायम हो।लेकिन पूर्वोत्तर का खूबसूरत राज्य सिक्किम इस सोच को सच साबित करता है। इसकी राजधानी गंगटोक में मुख्य रूप से एक ही पुलिस थाना पूरे शहर की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है — और हैरानी की बात ये कि यहां अपराध की दर बेहद कम है।

sikkim yatra

जहाँ देश के बड़े शहरों में बढ़ती आबादी के साथ अपराध का ग्राफ भी बढ़ता जाता है, वहीं गंगटोक में सामाजिक अनुशासन, मजबूत सामुदायिक संस्कृति और पुलिस-जन सहयोग ने इसे लगभग “क्राइम-फ्री कैपिटल” की पहचान दिलाई है।यहां न तो बड़े गैंगवार की खबरें आती हैं, न ही संगठित अपराध की सनसनी। पर्यटक रात में भी बेफिक्र घूमते नजर आते हैं। स्थानीय लोग कानून का सम्मान करते हैं और सामुदायिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हैं

sikkim yatra

सवाल ये है — क्या देश के अन्य शहर भी सिक्किम मॉडल से कुछ सीख सकते हैं?
क्या मजबूत सामाजिक ताना-बाना और पुलिस-जन विश्वास ही अपराध नियंत्रण की असली कुंजी है?सिक्किम यह साबित करता है कि सुरक्षा सिर्फ पुलिस बल की संख्या से नहीं, बल्कि समाज की सोच और सहभागिता से भी तय होती है।